‘राखी के आफ्टॅर इफैक्ट्स’
वैक्सीन लगाने के बाद कोविड 19 की दहशत कुछ कम हुई है। हालांकि तीसरी लहर की चेतावनी भी जारी है, फिर भी मॉस्क लगाए और वैक्सीन लगाए लोग कोरोना से मुकाबला करने को तैयार है। राम भरोसा तो हम भारतीयों का सदा बरकरार रहता ही है। आज चाची के चबूतरे पर भी रौनक लौट आई सी लगती है।सभी सखियाँ अभी भी राखी के मूड में ही दिखाई दे रही है। सब अपनी बात बताने में व्यस्त कि किसने कैसे मनाई राखी।
संगीता कहने लगी,“ इस बार तो हम बहन भाईबड़े भैया के घर पर ही इकठ्ठे हो गए थे। एक अरसे के बाद सब बहन भाई एक दूजे से मिले सबके बच्चे भी आ गए थे वैसे भी रविवार था किसी को काम पर जाने की कोई जल्दी नहीं थी, राकेश भी अपनी दीदी से राखी बंधवा कर वहीं आ गए थे। सब इकठ्ठे हों और ताश की बाजी न लगे हमारे मेंपरिवार ऐसा हो ही नहीं सकता। भाभी और उनकी बहू ने बहुत स्वादिष्ट खाना बनाया था।सारा दिन कहाँ बीता कुछ पता ही न चला। हम बड़े तो ताश में लगे रहे और बच्चे अपनी धमाचौकड़ी अलग मचाते रहे, वे सब भी कितने समय के बाद मिले थे।“ संगीता के चुप होते ही मोना ने अपना कान दिखाते हुए कहा,”ये देख भैया ने दिए हीरे के बूंदे थोड़े छोटे है पर कैजुअल वेयर के लिए बढ़िया है। मैंने तो भैया से पहले ही कह दिया था कि इस बार मुझे कुछ अच्छा चाहिए पिछले साल का मिला कर।” “फिर तुम क्या लेकर गयीं।“ रुपा ने पूछा तो इससे पहले कि मोना कोई जवाब देती कि कुसुम अपनी कहने लगी।
“मैंने तो भैया को यही बुला लिया था भाभी बच्चों को लेकर अपने भाई के घर गयीं थी हमने सारा दिन खूब एन्जॉय किया जोमेटो से खाना मंगाया अच्छी सी मूवी देखीNetflix पर , और हाँ अपना लेन देन तो स्टैंडर्ड का होता है हम जो भी हो एक दूसरे को ब्रैंडिड ही देते है। हमारा सामान एक दूसरे से इक्कीस होता है उन्नीस नहीं मेरी ममी तो बचपन से यही कहती थी स्टैंडर्ड मेनटेन करो। और एक मेरी ननद है हर बार इतना बेकार गिफ्ट लाती है कि क्या कहें कोई स्टैंडर्ड ही नहीं है, मैं तो इन्हें पहनने ही नहीं देती।इस बार तो हद ही कर दी शहर में रहकर भी Amazon द्वारा राखी भेज दी, मैंने भी Amazon से लॉकडाउन क्लियरिंग सेल का गिफ्ट भिजवा दिया, जैसे दो वैसा लो…”कुसुम कुछ अधिक ही ढींग हांक रही थी उसके चुप करने की इंतजार में सबका ध्यान एक तरफ चुपचाप बैठी सुनीता पर ही टिका था । हाल ही में कोरोना की दूसरी लहर में सुनीताके ममी पापा एक सप्ताह के अन्तराल में ही महामारी की भेंट चढ़ गए थे।
जैसे ही सुनीता से हाल पूछा तो एकदम बिफर कर रोने लगी सबने उसे किसी तरह ढाढ॔स बंधा कर चुप कराया। किसी तरह अपने मन को संभालते हुए कहने लगी,“मुझे तो ये लेना देना बेमानी लगता है,भाई बहन के रिश्ते को बहुत छोटा कर देता है। (अपनी रुलाई को किसी तरह थामते हुए सुनीता कहने लगी) दर-असल दो साल पहले जब मैं राखी पर मायके गयी तो यूँ ही राखी के नेग में मैंने ममी का कुन्दन हार मांग लिया मुझे बचपन से ही वह हार बहुत पसंद था, और शायद भैया को भी।भैया वह हार भाभी को देना चाहते थे। बस इसी बात पर हम दोंनो भाई बहनअड़ गए ममी पापा ने काफी समझाया पर हम दोंनो ने उनकी एक न सुनी
तो पापा ने गुस्से में कहा कि अभी यह हार किसी को नहीं मिलेगा हमारे जाने के बाद जो हो सो हो। इसी गुस्से में भैया ने जो उपहार दिया उसे भी नहीं लेकर आई।
पिछले साल तो वैसे ही सब बंद ही रहा इसलिए ममी ने हम दोंनो में मान-मनुहार करके किसी तरह विडियो कॉलिंग पर राखी मनवा दी। इस साल जो हुआ कहते कहते उसकी रुलाई छूट गईऔर आंसुओं के संग दुख व पश्चात्ताप भी बह निकला, समय इतना कुटिल हुआ कि माता पिता केअंतिमदर्शन भी न कर सकी मन में जीवन भर के लिए अफसोस रह गया। इसलिए इस बार राखी पर भैया भाभी ने आने के लिए कहा तो मना न कर सकी दो दिन के लिए होकरआई हूँ ।समझ ही नहीं आ रहा था भैया के लिए क्या लेकर जाती क्योंकि भैया भाभी ने कुछ भी लाने से मना कर दिया था।घर के बने बेसन के लड्डू लेकर गई जो भैया के लिए ममी खास बनाया करती थी । मैंने तो डरते हुए भैया को दिए। और लड्डू देखते ही उनकी आँखे भर आई, मेरे बहुत मना करने पर भी ममी का कुन्दन हार मेरे गले में पहना दिया । कहते कहते सुनीता फूट फूट कर रोने लगी।
माहौल एकदम मार्मिक हो गया सब अपनी आँखे पोंछ रहे थे। तभी चाची ने सुनीता को चुप करवाते हुए कहा कि भाई बहन का रिश्ता कच्चे धागे की डोर से बंधा है जिसमें केवल भाव ही मुख्य है मेरे अनुसार लेना देना इसका मापदंड नहीं होना चाहिए क्योंकिकिसी भी रिश्ते को पैसे से तौला जाएगा तो वह हल्का ही दिखेगा।इसी संदर्भ में एक कविता आप लोगों को सुनाती हूँ।
‘ राखीधागेकात्योहार’
कच्चे धागे की इक डोर है इस नैया की पतवार ,
इस कच्चे धागे की डोरी में बंधे हुए है भाव,
नहीं मात्र ये व्यवहार है ये भाई बहन का प्यार।
पिता के मन की तसल्ली माँ के मन का चाव ।
राखी धागे का त्योहार राखी धागे का त्यौहार। ।
किस सोच में डुबी है मेरी प्यारी सी बहना ,
बता घर में बहन तेरे सब कुछ ठीक तो है ना ।
छवि पापा की उभर आई बहन के मन में सहजे में,
के पूछी बात भैया ने बहन से ऐसे लहजे में ।
दिया जब भाभी ने ननदी को प्रेम भरा ताना ,
दीदी आपकी की मर्जी का आज बना है खाना।
सुबह से आपके भैया लगा रहे थे यही गुहार ,
जो बहना को है मेरी भाता रसोई वही करो तैयार
के आएगी मेरी बहना आज है राखी का त्यौहार ।
सुनी जो बात, बहन को रुलाई सी छूट आई ,
के आज भैया के घर के हर कोने में थी उसको माँ नजर आई ।
नहीं मात्र ये व्यवहार राखी धागे का त्योहार ।
कठिन समय जो आ जाए अपने भैया के ऊपर ,
जूझ जाती है बहना भी भूलकर अपना घर-परिवार ।
भले ससुराल में कितना ही सुनने को मिले ताना ,
मगर सिर नीचा भैया का नहीं होने देती बहना ।
कच्चे धागे की डोरी में ऐसे बंधे हुए है भाव,
नहीं ये मात्र है व्यवहार राखी धागे का त्यौहार ।
समझ सके जो इक दूजे के सुख दुख वाले भाव ,
छोटे पड़ जाते है तब बड़े बड़े उपहार ।
राखी धागे का त्योहार राखी धागे का त्योहार ।
अनीता सोनी
Email anita3soni@gmail.com
राखी धागे का त्यौहार

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Very beautiful and touching story…
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Thanks suman ji keep following 🙏
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Lovely ☺️😔
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