‘  हिंदी दिवस ‘

मौसम खुशगवार है। आसमान मैं बादल छाये है कभी हल्की सी बूंदाबांदी तो कभी कहीं से बादलों के परदे को फाड़ते हुए एकदम आँखों को चुंधियाती सी धूप ऐसे निकल आती है, जैसे कह रही हो कि मेरे अस्तित्व को चुनौती देना इतना आसान नहीं पर फिर धीरे धीरे बदली घिरने लगती है और शनैः शनैः मद्धिम पड़ती धूप को कह रही हो कि मैं तो तुमसे आँख मिचौनी खेल रही हूँ अगर अपनी मौज में आ जाऊँ तो तीन तीन दिन तक तुम्हारा दर्शन भी नहीं होने देती, और फिर से बादलों को धकेलती हुई धूप चमकते हुए कहती है, तुम जितना ज्यादा घिर कर आओगे मैं उतना अधिक चमक कर आऊंगी। बादलों और धूप की लुका छिपी में शीतल मंद बहती बयार तन को सुख देती हुई मन को भी लुभा रही है। खुशगवार मौसम ने मूड को भी खुशगवार बना दिया है।����


मौसम का आनंद उठाने के लिए आज चाची समय से पहले चबूतरे पर बैठी अपनी मस्ती में कुछ गुनगुना
रही है । बस कुछ ही देर में बच्चे भी चबूतरे की तरफ दौड़ते नज़र आए। अचानक सभी बच्चों को अपनी तरफ
दौड़ते हुए आते देख कर चाची को हर्ष हुआ और कुछ अचंभा भी क्योंकि बच्चों के हाथों में फूल कार्ड इत्यादि
पकड़े हुए है । “ अरे भई क्या बात है आज इतने सारे फूल और कार्ड आज तो मेरा जन्मदिन नहीं है बच्चों !”
चाची ने हंस कर कहा । चाची को फूल इत्यादि पकड़ाते हुए सभी बच्चे एक ही स्वर में गाते हुए बोले, “ हैप्पी
टीचर्स डे” “ हम आपको टीचर्स डे के लिए विश कर रहे है , आप हमको कितनी अच्छी कहानियाँ कविताएँ और
कितनी अच्छी अच्छी बातें सिखाती है इसलिए आप भी हमारी टीचर हैं।“ “ भई आज तो बच्चों ने चाची को बहुत
खुश कर दिया मेरे प्यारे बच्चों का बहुत धन्यवाद देखो मैं भी आज केक बना कर लाई हूँ , पर पहले बताओ कि
शिक्षक दिवस 5 सितंबर को क्यों मनाते है? “ सबसे पहले चाची की नज़र बातूनी नमन की तरफ गई “ ओह यू मींस टीचर्स डे “ चेन्नई के बच्चों को हिंदी बोलने में अक्सर मुश्किल होती है पर चाची के चबूतरे पर हिंदी में बात करना जरूरी है , फिर भी बच्चे अंग्रेजी में बात करते जिसके लिए चाची उन्हें बार बार टोकती पर नमन अक्सर अंग्रेजी में ही बात करता है। हालांकि कई तमिल भाषी भी चबूतरे पर आने से हिंदी में बात करना
सीख रहे है और पसंद भी करते है । चाची के साथ हिंदी बात करने में मज़ा भी आता है । अपनी बात को पूरी करते हुए नमन अंग्रेजी में बोलने को शुरु हुआ तो चाची की ना की मुद्रा में हिलती गर्दन को देखकर कहने लगा ,


“ओके ओके आई विल स्पीक इन हिंदी, 5 सितंबर भारत के दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली डा० राधाकृष्णन का जन्मदिन है। जिसे टीचर्स डे आई मीन ‘शिक्षक दिवस ‘ के रूप में मनाया जाता है। उनका जन्म ईयर 1888 को तमिलनाडु के तिरतनी कस्बा में हुआ था । वे बहुत ऐजुकेटिड थे , तथा पढ़ाई में उनको बहुत इंटरेस्ट थी । वे चाहते थे कि हमारे देश के सभी बच्चे बहुत पढ़ाई लिखाई करें । उन्हें भारत रत्न सम्मान प्राप्त था। उन्हें और भी कई विदेशी अवार्ड मिले थे । जय हिंद “ नमन को रटे हुए निबंध को बोलते देख कर सबको हंसी आ गई। अपनी हंसी को थामते हुए चाची ने नमन को बहुत शाबाश दी और कहा कि नमन की जानकारी बिल्कुल सही है इसलिए नमन को
डबल केक मिलेगा। तभी हार्दिक ने कहना शुरू कर दिया ,” डा० राधाकृष्णन मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ते थे । बाद में वे मद्रास के प्रेसीडेंसी कॉलेज के प्राचार्य बने और फिर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के कुलपति बने ।“ चाची को ताली बजाते देख सभी ने जोर से तालियाँ बजाई और सब मजे से केक खाने लगे ।


सभी बच्चे अपने कानों पर ��मॉस्क लटकाए मस्ती करते हुए केक का मजा ले रहे थे कि, बीच में नैपकिन से अपना मुहँ पोंछते हुए सारा बोल उठी “चाची अब कहानी सुनाएं न अभी तो टीचर्स डे खत्म हो गया ।“ कानों के ऊपर लटकते लम्बे पोनी टेल और बडी बडी आँखो वाली प्यारी सी सारा ने जब अपनी धीमी सी आवाज में पूछा तो
बाकी सब बच्चे भी उसकी हाँ में हाँ मिलाने लगे। चाची ने कहा ,” 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस है ।तुमको मालूम है कि हिंदी भाषा भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। फिर भी यह कम हो रही है क्योंकि हमारे देश के बड़े शहर में रहने वाले लोग अपने बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाना और अंग्रेजी में बात करना पसंद करते है । “ तभी सौरव ने पूछा कि,” हिंदी तो हमारे देश की मुख्य भाषा है तो फिर हिंदी तो हमारी राष्ट्रीय भाषा होनी
चाहिए।“ “हाँ होनी तो चाहिए परन्तु 1949 में जब भारत का संविधान लिखा जा रहा था तो अंग्रेजी के बढ़ते प्रसार को
देखते हुए हिंदी को भारत की राष्ट्रीय भाषा घोषित करना चाहते थे, पर दक्षिण भारत में इसका विरोध किया गया इसलिए भारत का संविधान हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखा गया और हिंदी को राष्ट्रीय भाषा न बनाकर 14 सितंबर 1949 को राज भाषा का दर्जा दिया गया तभी से भारत भर में 14 सितम्बर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है। हम हिन्दुस्तान में रह कर यदि हिंदी नहीं सीखे या बोलेंगे तो आने वाले समय में हिंदी और कम होती जाएगी और यह बात हमारी संस्कृति को भी कमजोर बनाएगी । और एक पते की बात बताती हूँ , जब मैं यूरोप घूमने गई तो पता लगा कि फ्रांस में तो बिलकुल भी अंग्रेजी नहीं बोली जाती वहाँ लोग केवल फ्रांसिसी भाषा बोलते है , जर्मनी में भी लोग जर्मन भाषा को ही प्राथमिकता देते है । परन्तु भारत में हिंदी बोलने वाले को हीन दृष्टि से देखा जाता है , कई अंग्रेजी मिडियम स्कूलों में नियम है कि अंग्रेजी छोड़ कर किसी और भाषा में बात करने पर जुर्माना भरना पड़ता है । हमें किसी भाषा का अपमान नहीं करना चाहिए परन्तु अपनी ‘ राज भाषा हिंदी’ का सम्मान करना चाहिए ताकि आने वाले समय में हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा दिया जाए । इस हिंदी दिवस पर सब बच्चे प्रण करते है कि हम सब हिन्दी पूरी तरह सीखेंगे और बोलेंगे ।“ कहकर चाची ने नमन की तरफ देखा चाची को देखते ही नमन कहने लगा ,” yes yes I understood I will speak in hindi” उसके चुप होते ही सब जोर से हंसने लगे तो उसे समझ आया अपने सिर पर थप्पड़ मारने हुए उसने कहा ,” ओ माफी……… माफी
मैं…… आगे से हिन्दी में …… बात करूंगा ही ही ही ही चबूतरा हंसी से गूंजने लगा । चलो अब हम अंग्रेजी के
कैलेंडर से हिन्दी में महीनों के नाम सीखेंगे । तो आज की कविता के संग सारा अभिनय करके दिखाएगी क्यों सारा ? सारा
खुशी से अपनी दोंनो चुटिया हिलाते हुए उठ खड़ी हुई ������

बाल कविता हिन्दी का पंचांग


आओ बच्चों प्यारे बच्चों आज नया एक खेल खिलाए ,
अंग्रेजी के कलैंडर से हिन्दी का पंचांग सिखाए ।
मार्च महीना जब भी आए परीक्षा अपने संग में लाए,
हिन्दी का नव वर्ष कहाए मौसम तन को खूब सुहाए,
ये तो चैत्र मास कहलाए ।
अप्रैल का जब आए महीना नयी कक्षा का चढ़ जाए जीना,
खेती में हो शुरु कटाई ग्रीष्म ऋतु की आहट आई ,

महीना यह बैसाख का भाई ।

महीना जब मई का आए गर्मी की छुट्टियाँ हो जाए,
नानी के घर खुशी से जाए प्यारे नाना आम खिलाए,
ये तो जेठ मास कहलाए ।
आया है अब जून महीना सूरज खूब फुलाए सीना,
झर झर बहता खूब पसीना ठंडा ठंडा शर्बत पीना,
ये तो है आषाढ़ महीना ।

अब आया है मंथ जुलाई स्कूल खुले और शुरु पढ़ाई,
किसान खेत में करे बुआई काली घटा अंबर पे छाई ,
आया सावन झूम के भाई ।
अगस्त महीना जब भी आए आजादी का दिवस मनाए
पानी बरसे छम छम छम बिन छाते न निकले हम,

ये तो भादों मास कहलाए ।
आया है अब मंथ सितंबर छमाही में कितने नम्बर,
धरती पर हरियाली छाई पूजा की छुट्टियाँ भी आई,
ये तो अश्विन मास है भाई ।

अक्तूबर का मास है आया दिवाली अपने संग में लाया,
जग मग जग मग दीप जलाएँ भर भर पेट मिठाई खाए,
ये तो कार्तिक मास कहलाए ।
नवंबर मंथ में बजे शहनाई शादी का मौसम है भाई ,
अच्छी न अब लगे पढ़ाई शिशिर ऋतु भी मांगे विदाई ,
मार्गशीर्ष ये मास है भाई ।
दिसंबर के संग जाड़ा आता पारा दिन दिन गिरता जाता,
भूनी मूँगफली मन को भाए क्रिसमस की छुट्टियाँ खूब ।मनाए

, यह तो पौष मास कहलाए ।
आई जनवरी सेंके आग सूरज देव दिखे न खास ,
मन चाहे बस ओढ़ रजाई तिल गुड़ खाते जाए भाई,
ये तो माघ मास है भाई ।

फरवरी के संग आए बसंत खिलें फूल और उड़े पतंग ,

मौसम में है मस्ती छाई होली आई होली आई ,
ये तो फागुन मास है भाई ।
तो देखा प्यारे बच्चों कितना मजा आज है आया खेल खेल में पाठ पढ़ाया,
अंग्रेजी के कैलेंडर से हिन्दी का पंचांग सिखाया ।
हिन्दी है भारत की शान , हिंदी तो है हिंद की आन ।
हिंदी तो हमारी जान , हिंदी का हम करेंगे मान ।
जय जय हिंदी जय जय हिंद, जय जय हिंदी जय जय हिंद ।

18 Comments

  1. Shiv kumar Goenka's avatar Shiv kumar Goenka says:

    Good . Keep it up . Send it some sahitya group for their comments

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    1. Bhupesh Pratap Singh's avatar Bhupesh Pratap Singh says:

      बहुत ही सुंदर लिखा है। पढ़कर आनंद आ गया

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      1. Vijay Mohan Singh's avatar Vijay Mohan Singh says:

        पूरा पढ़कर ही चैन आया..
        पढ़ते-पढ़ते आनंद आया…

        विजय मोहन सिंह

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      2. Anita Soni's avatar Anita Soni says:

        धन्यवाद भूपेश जी🙏

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    2. Anita Soni's avatar Anita Soni says:

      Thanks bhaiya please guide me to to send it to any sahitya group

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      1. P Divya's avatar P Divya says:

        Wow mam such a nice thought and a creative poem😊✨

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    3. Prerna's avatar Prerna says:

      Bahut sundar story

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  2. डॉ.मंजु रुस्तगी's avatar डॉ.मंजु रुस्तगी says:

    अनिता जी, बच्चों को खेल खेल में ही सिखाया जा सकता है। शिक्षक दिवस की जानकारी और हिंदी में महीनों के नाम आपने बहुत ही सही ढंग से बताए हैं। बच्चे तो क्या बड़ों को भी नहीं पता होंगे। बहुत ही प्रशंसनीय….इसी तरह सृजनरत रहें।

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    1. Anita Soni's avatar Anita Soni says:

      आपका तहे दिल से शुक्रिया मंजू जी आपकी टिप्पणी मेरे कुछ खास मायने रखती है🙂

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  3. bhumit kohli's avatar bhumit kohli says:

    nice one चाची, it was very engaging to read.

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    1. Anita Soni's avatar Anita Soni says:

      Thanks bhumit

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  4. priyanka soni's avatar priyanka soni says:

    Beautifully written. I loved the part when kids coming running to chachi

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  5. Kant Gupta's avatar Kant Gupta says:

    You have put forth HIndi Divas so beautifully using literary style, figurative and non figurative expression that shows the problem, solution, acceptance and appreciation!!! Hope you participate in Literature Festival in India. You rock !!!!🎉🎊👏👏

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  6. Anita Soni's avatar Anita Soni says:

    🙏🙏

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  7. namzprgmailcom's avatar namzprgmailcom says:

    Chachi ke kisse padhkar apne khud ke bachpan ki yaad Aa jati hai… Chachi ne na hi humare kisse sune par apne khud ke bachpan ke mazrdaar kisse bhi bahut sunae..

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  8. namzprgmailcom's avatar namzprgmailcom says:

    Yeh pad kar Hume apne bachpan ki yaad Aa jati hai.. Chachi na Sirf humare kisse sunti par apne khud ke bachpan ke mazrdaar kisse sunakar khoob hasati.. Chachi ka chabutra hai bada purana ab nikal kar aaya duniya ke saamne ka Yeh khazana..

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    1. Anita Soni's avatar Anita Soni says:

      Thanks nam for the beautiful comment

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  9. Deepa Sabharwal's avatar Deepa Sabharwal says:

    Beautifully written! Loved the narration … keep it up !!

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