लोह्ड़ी ,संक्रांति ,पोंगल

            

आज घरोंदा सोसाइटी में  सफाई धुलाई का  काम चल रहा है। हाँ भई पोंगल का त्यौहार आ रहा है। जिसे  मनाने की तैयारियाँ खूब चल रही है। चाची का चबूतरा भी अपने फुल ऐक्शन में  नज़र आ रहा है। गपशप करती औरतें,  खेल कूदकर खुद  को तरोताजा करते बच्चे। आजकल शाम को छः बजने से कुछ  पहले शाम गहराने  लगती है। जहां उतर भारत में  शीत लहर चल रही है वही चेन्नई  का मौसम अपने बेहतरीन समय में  है न कुहासे  से भरी सर्दी और न ही  उमस भरी गरमी शायद इसी को मीठी ऋतु कहते है और ऊपर से त्यौहार। उतर भारत  की लोह्ड़ी पश्चिम भारत का उतरायण मध्य प्रदेश उतर प्रदेश की मकर संक्रांति, उतर पूर्व का बिहू और दक्षिण का पोंगल । बस यही चर्चा  चल रही है। 

अपने देश की विविधता से भरी संस्कृति भी लाजवाब है। एक ही त्यौहार को हर क्षेत्र  में अलग रूप में  मानाया जाता है ।

माघ मास में  आने वाले यह  त्यौहार फसलों  से जुड़े  है। इस समय फसलों  की कटाई हो जाती है तथा नई फसल की बुआई  हो जाती है। पकी फसल को बेचकर किसान मालामाल होता है । 

जब जेब में  दाम हो मौसम खुशगवार हो तो त्यौहार  तो बनता ही है। कुछ पौराणिक कथाएं  जुड़ी है।  चूंकि अपना देश एक कृषि प्रधान देश है इसलिए यह सभी त्यौहार खेतीबाड़ी से जुड़े है।

आज तो लोह्ड़ी यानि आग जलाकर खुशी मनाते हुए  तिल की रेवड़ी, गजक मूंगफली 

गुड़ पोपकोन और नाचगाकर जाड़े का मजा लेने में  अपना ही आनंद है।

चूंकि चेन्नई के मौसम आग जलाने के लिए फिट तो नही है  पर महानगरों मे सब जगह के लोग आकर बस जाते है इसलिए  बड़े प्रेम से इन सोसाइटियों में  मिलजुल कर सभी त्यौहार मनाए जाते है। घरोंदा सोसाइटी  में  भी लोह्ड़ी, संक्रांति और पोंगल तीनो त्यौहार ही मनाए जा रहें  है।

आज चाची भी अपनी कविता के संग हाजिर है।

                      लोह्ड़ी 

 खड़ी फसल की हुई  कटाई।

नयी फसल की हुई  बुआई ।

 भरी किसान की जेब है भाई।

घर में  आई नयी भोजाई। 

पाले ने है धूम मचाई। 

हम भी मिलजुल धूम मचाएं ।

लोह्ड़ी का त्यौहार मनाएं।

आग जलाकर डाले भंगड़ा। 

ढोली ढोल बजाए तगड़ा। 

पहन रेशमी सलवार और कुर्ता 

सहेलियां डाल रही है गिद्धा। 

मक्की की रोटी सरसों का साग ।

मिलजुल कर सब तापते आग।

गजक मूंगफली तिल रेवड़ी, 

जुग जुग बनी रहे नयी जोड़ी।

दे-दे  अब तो लोह्ड़ी माई।

जुग जुग जीवे  तेरा जवाई ।

मुंडे  कुड़ियो दोनों आओ ।

सुन्दर मुंद्रिय मिलकर गाओ।

घर में  आई नई भोजाई ।

आज कंजूसी चले न माई।

दादा की हुई  बड़ी कमाई। 

अब तो लोह्ड़ी  दे-दे माई।

भरा हुआ  है तेरा बटुआ। 

दे दे नहीं  तो काटे अटुआ। 

कहीं  पोता कहीं पोती आई।

किसी की दुल्हन नयी ब्याही।

लाख लाख हो लोह्ड़ी की बधाई। 

बहुत  बधाई  बहुत बधाई लोह्ड़ी की हो बहुत बधाई। 

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अनीता सोनी चेन्नई 

                           

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