‘ सुबह  हो गई ‘

                                                              ‘ सुबह  हो गई ‘

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अभी सुबह के चार बजे है। गली के एक कोने की पटरी पर नारियल पानी बेचने वाले पति-पत्नी अपनी दुकान लगा रहे है। साइकिल पर चाय बेचने वाले की पहली बोनी यहीं से होती है। अभी पांच भी नहीं बजे कि नारियल वाले की दुकान पर कुछ लोगों की शिरकत हो गई चाय वाले की ताजी और गर्मा गर्म चाय का दौर शुरू हो गया। दो दो कुरकुरे बटर बिस्कुट थमाते हुई चाय वाला खुद भी सुर्खी लगाकर चाय सुड़कने लगा। लक्ष्मी अम्मा और वल्लिअम्मा भी आ पहुंची। 

“क्या बात आज इतनी सुबह आ गई.”……. नारियल वाली ने पूछा। इतने दिन कहाँ थी दस नम्बर वाली रोज पूछ रही थी……..आज तो नयी कामवाली भेजने वाली थी वहाँ। ….

“अई ओ…. अक्का और दो चार दिन का बात है। अभी शनिवार को तो वोटिंग होगा ही बस फिर सब काम पर आ जायेगी न….अभी तुम बोल देना हम बिमार है।”….. लक्ष्मी अम्मा ने कहा।

“मेरा तो ससुर मर गया ऐसा कहना”…..हसँते हुए चाय में बिस्कुट डुबोते हुए वल्लिअम्मा बोली।

“तेरा अभी कोई  रिश्तेदार बचा है मरने को कितनी बार मारेगी सबको…मैं तो परेसान हो गई तुम लोग के वास्ते झूठ बोलते हुए”….नारियल वाली ने कहा।

“भई मजा है हम तो इधर में चौबीस घंटे का ड्यूटी में रहता हूँ तो हिल भी सकता नहीं वैसे कितना मिल रहा है….. आजकल रैली में…।“ सामने वाले बंगले के वॉचमैन ने चाय का कप कूड़ेदान में फेंकते हुए पूछा।

“ पार्टी की साड़ी, बिरियानी और चार-पांचसौ मिल जाता है।“…. लक्ष्मी अम्मा अपनी साड़ी से हाथ पोंछते हुए बोली।

“ अरे सब लोग चाय पी लिया क्या……?” दौड़ता सा सैल्वम आया “ हमको भी चाय दे दो अभी अभी रात का पार्टी खत्म 

हुआ अभी आखिरी गाड़ी भेज  कर आया….. रात भर म्यूजिक बज रहा था सिर फटने को है अन्ना जरा डबल चाय देना बड़े गिलास में…., इतना पिएगा  कि नहा ले सकता दारु में  अभी सब बॉटल भी उठाने का है नहीं मार्निग वाला वॉचमैन  लेकर जाता …….। आज तो अपना पीजा पार्टी  होगा आएगा क्या…..?  छः  सात डिब्बा  बचा रहेगा और गारलिक ब्रैड  भी …….”।

“पर मजा नहीं आता रबड़ के माफिक रहेगा …..  सारा पीजा ठंडा  होगा “ पहले वाले वॉचमैन  ने कहा ।

“मैं मेरे घर में माइक्रोवेव लाई …..  सो  होना तो दोपहर में  गर्म करके  देती “ नारियल वाली ने मुस्कुराते हुए  कहा ।

“अरे वाह कांग्रेसुलेसन वल्लिमा  हंसते हुई…..मैं भी  ट्राई  करती सो आने  का……।“  हंसते हुए……

अचानक गली के कोने पर पड़े बड़े से कूड़ेदान में आवाज आई सब का ध्यान उधर चला गया.। …”अरे…कोई उधर होता समझती मैं.”..।..नारियल वाली ने कहा सभी कूड़ेदान की तरफ लपके…..कौन!….कौन! गली की लाइट से कूड़ेदान कुछ  दूर था और अंधेरे की वजह से कुछ  साफ नहीं दिखाई  दे रहा…करीब से देखा तो कूड़ेदान के भीतर  आधी लटकी हुई औरत कंधे पर प्लास्टिक की बोरी डाले कूड़ेदान को टटोल रही थी। “तू कौन री इधर”…कुछ चिल्लाती सी नारियल वाली “ये तो कनमाँ ….कोनी (बोरी) आया का   एरिया  मैं जानती सो….तू कौन री ……”

कूड़ेदान में से बाहर निकलते हुए उलझे हुए  बालों के साथ छोटी सी कद काठी वाली दुबली सी औरत बोली “ माँ… मैं… कनमाँ का छोटा बहु होती… उन्हेंइछ इधर भेजा सो….कनमाँ ओढ़म सेरी इल्लै…सुबो सुबो  आना तो कुछ  मिलता सो…।“

 “खोदा पहाड निकला चूहा”…  सब वापिस  मुड़ लिए । चलते है कह कर तीनों  वॉचमैन ने अपना झाड़ू उठाया और अपने अपने बंगले पर जाकर झाड़ू देने लगे। चाय वाला अपने पैसे समेट साइकिल पर पैडल मारता ट्रिन…ट्रिन घंटी बजाता आगे बढ़ गया। वल्लि और लक्ष्मी  भी कुछ और औरतो को भी इकठ्ठा करना है कहकर सामने बड़ी सड़क पर बने फ्लाई ओवर के नीचे सोए लोगों की तरफ बढ़ गई। 

पति पत्नी ने दुकान  जमा ली थी। पति अपने स्कूटर पर इधर उधर नारियल बांधने लगा कालोनी के कुछ बंगलो  पर दैनिक  सप्लाई करनी होती थी सो अंधेरा छंटने पहले ही सब तैयारी पूरी कर ली थी अब पौ फटने का इंतजार था । तभी एक साइकिल रूकी। “अरे रमेश अन्ना आज इतनी तड़के”…..नारियल वाला।

“हां आज साहब को एयरपोर्ट छोड़ना है और नेपाल से भतीजा आ रहा है उसे लेना है। उसके माफिक काम हो तो बताना फिलहाल तो उसे ड्राइवर का काम भी सिखाना पड़ेगा। अभी के लिए कोई भी काम झाड़ू कटके का काम भी मिला तो चलेगा।“……रमेश  ने कहा।

पन्द्रह नम्बर में कुत्ते घुमाने का काम है आधा घंटा सुबह आधा घंटा शाम को तीन हजार महीना मिल जाएगा होना तो कल ले आना फिर कही गाड़ी सफाई  भी मिल जाएगा।  नारियल वाले ने कहा।

सुबह सुबह दूध और ताजा अखबार देने वाले  भी इक्का दुक्का लोग दिखाई देने लगे है।

पक्षियों का कलरव तेज हो गया है। कालिमा भी छंटने लगी है । ईशान की तरफ से गगन पर लाली छिटक रही थी। यूँ तो सीधी सड़क मरीना बीच को ही जाती है। कुछ तीन चार जवान  लड़के दौड़ लगाते  समुद्र की तरफ जा रहे है। सुबह की सैर वालों की आवाजाही भी शुरु हो गयी। 

सिवा मणि और जयश्री ने अपने दुपहिए स्कूटर को कालोनी के कोने पर पार्क किया और तेज गति से चलना शुरु कर दिया सामने से आते हुए अब्दुल और सायिदा दिखाई  दे गए। ये दो जोड़े रोजाना कॉलोनी के दोनों कोनों पर अपने अपने स्कूटर खड़े करते  और खूब बतियाते हुए वर्किंग करते है। दोनों तरफ बने सुन्दर बंगलो के आगे घने घने पेड़ो से घिरी  तकरीबन एक किलोमीटर लम्बी ये घुमावदार साफ सुथरी सड़क शहर के  बीचोबीच  वाकिंग करने की नजर से बहुत ही उत्तम समझी जाती है। आसपास की गलियों के लोग अक्सर  अपने दुपहिए कोने पर खड़े करके सुबह की सैर करते दिखाई  देते है। वह बात और है कि इस कॉलोनी के लोग यहाँ सैर नहीं करते  वे लोग  गोल्फ कोर्स , ई .सी .आर, जिम या फिर क्लब ही जाते है।

“अब तो इस गली में भी तीन-चार बंगले टूट कर फ्लैट बन गये है….।” सिवा मणि ने अब्दुल से कहा ।

“बन तो गये  मियाँ ……पर अपनी तकदीर  में कहाँ ……”। अब्दुल ने कहा ।

“क्या हुआ साईदा हिजाब  का….. आज तो हिजाब छोड़ दुपट्टा भी नही॔ लिया तुमने ….। “ जयश्री ने शरारत से पूछा ।

“अरे छोड न…. अब्दुल  की जेब में है दुपट्टा सैर करके पहन लूंगी वो तो मैं सास-ससुर की वजह से दो-चार दिन हिजाब पहन कर आती रही ….. अरे कितना मुश्किल  है हिजाब  पहनना और वो भी सैर करते हुए  तुझे क्या  पता तूं तो सैर भी जॉगिंग की ड्रैस  में करती है । सलवार कमीज़ तो फिर भी ठीक है ,पर बुरखे और हिजाब  में तो हालत ही खराब  हो जाती है ऊपर से नमी भरा मौसम हम भी इंसान है आखिर  ….. पर अब्दुल  तो बहुत समझते है इस बात को उन्होंने तो साफ ही कह दिया अम्मी अब्बू से जितना चाहे हल्ला  मचे पर मुझे कोई  फर्क नहीं पड़ता इससे, औरत भी आखिर इंसान है …..पहनावा मुहाज़िब होना चाहिए और आरामदेह भी और सलवार कमीज़ से बढ़कर मुहाज़िब और आरामदेह लिबास  औरतों के लिए और कोई नहीं है………।”कहते हुए  साईदा की नज़रें अब्दुल  को निहारने लगी ।

अब कालोनी में सैर करने वालों की संख्या बढ़ गयी थी । धीरे धीरे सुबह अपनी रंगत में आ रही थी ।कोई   लोग राजनैतिक चर्चा करते तो कोई अकेले अपने कानों में इयरफोन लगाए  अपनी अपनी मस्ती में सुबह की सैर का आनंद  ले रहे है ।

अब कुछ बंगलो की बालॅकनी में भी प्यालियाँ की खनक सुनाई दे रही थी और किसी किसी घर के आगे से गुज़रे तो फिल्टर  कॉफी की महक लुभा रही है । 15 नम्बर  वाले खुश  हो रहे थे कि कल से कोई  कुत्ते घुमाने के लिए कोई आ जाएगा। 22 नम्बर  वाले साहब अपनी ऑडी गाड़ी में एयरपोर्ट  की तरफ निकल चुके थे । 

10 नम्बर के मालिक   जानकीरामन अपने पुश्तैनी बंगले  की बालॅकनी  में बैठे अखबार  में मुहं गढ़ाए कॉफी की चुस्कियों  ले रहे है। भीतर पूजा घर में सुप्रभातम चल रहा है और बाहर पत्नी  का सुप्रभातम शुरू हो गया है।   “मैं कहती हूँ जी अब इतना बड़ा घर  मेंटेन  करना कितना  डिफीकल्ट  है । दोनों बच्चे तो स्टेट्स में सैटल हो गए , हम भी यहां फ्लैट  बना लेते है…कैश भी आ जाएगा और छोटे घर में नौकर लोग का खर्चा भी कम होगा …। ”  “ ऐ गायत्री अम्मा तुम्हारा  सुप्रभातम हुआ तो हमारा भजन सुन लो …हम तो  यहां पैदा हुआ  अभी मरकर  ही जाएगा …..तुम तुम्हारा  सुप्रभातम  रोज गाएगा हम अपना भजन रोज सुनाएगा ….,! 

19 नम्बर  में तो चर्चा अधिक  गंभीर है। मोहनलाल जी ने जीवन भर खूब कमाया इतना बड़ा बिजनेस  खड़ा किया  कई  जायदाद भी बनाई पर बड़ी उम्र  और बिमारी ने घर में बिठा दिया और  दोनों  बेटों ने  खूब ऐश मस्ती के साथ साथ खुद को बड़ा बिजनेस मैन साबित करने के चक्कर  में बिना सोचे समझे और  दूसरे धंधों में पैसा लगाया और अनुभवहीनता ने नीचे ला पटका  नये  धंधे  तो चले नहीं  और पिता द्वारा  लगाया बिजनेस  किस तरह बचाया  जाए ये नौबत आन पड़ी है। बेचारे मोहनलाल जी बहुत दुखी है। इस घर को बेच कर कही दूर  किसी नयी कॉलोनी में घर ले लिया जाए  और पैसा बिजनेस में डाल दिया जाए  वैसे भी बहुत भीड़ भरा इलाका हो गया है। बेटों के आगे मोहनलाल  जी  कुछ कहना चाहते है परन्तु अपनी शारीरिक  लाचारी के आगे मन मसोस कर रह जाते है। तो ठीक है इस घर को बेचने के लिए  दलाल को कह देते है।

सैर करने वालों की भीड़ अब कुछ  कम  होती सी लग रही है क्योंकि  दो बड़ी सड़को को जोड़ने वाली  इस छोटी सड़क पर भी ट्रैफिक  शुरू हो चुका है।  सूर्य भगवान  प्रतिपल  और अधिक चमकदार  होते जा रहे है। सुबह अपने पूरे रबाब में है। किसी घर में कोई  माँ बच्चों को दुलारते हुए  कह रही है उठो सुबह  हो गई  । किसी घर में खंगारते हुए  किसी बुजुर्ग  ने पूछा … क्या  सुबह हो गई? ….. कोई  चट से उठा और चिल्लाया  अरे सुबह  हो गई………..!

                                                       सूर्य के संग आती है आशा की किरण 

         अनीता सोनी चेन्नई 

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