हे कृष्ण! तुम क्या हो ? आखिर क्यों सता जाते हो।
उठते हो सागर की लहर से, एक भाव में खो जाते हो ।
पैदा होते हो कारागार में, गोकुल में खुशियों का बिगुल बजाते हो।
कितने राक्षसों का उद्धार कर कालिया के फन पर नृत्य करते हो ।
रास रचाते हो, कभी एक चुटकी अंगराग के बदले कुब्जा को सुन्दरी बना जाते हो।
कूंजों में बजाते हो कभी बाँसुरी, युद्ध के मैदान में कभी गीता सुनाते हो।
बंध जाते हो कभी हाथ से यशोदा के, और कभी यूं ही कंस को मार गिराते हो।
गोपों के संग वन विहार करते हो कभी
अंगुलियों में फंसाए नींबू आचार को खिचड़ी संग चाट चाट के खाते हो ।
अपहरण करते जब ब्रह्मा सबका तो गाय बछड़े गोप ,ग्वाले, फूल पत्ते, श्रृंगी, कौड़ी,
बाँसुरी, डंडे, हरा अंगोछा, काला कंबल, पीली धोतीऔर न जाने क्या क्या सब तुम ही बन जाते हो।
कितने ही द्वंदों को जीता है तुमने, छोड़ एक युद्ध अदना सा रणछोड़ कहलाते हो।
हे कृष्ण! आखिर क्या हो?
अपनी नाम से मोह ले जाते हो।
गोपियों के कन्हैया ,बलराम के भैय्या ,
यशोदा के कान्हा, राधा के श्याम, गोपों के सखा , नंद के लाला माखनचोर,बनमाली, बनवारी ,बंसीवाला
क्या क्या हो तुम ? केशव, माधव ,मधुसूदन
मोहन, मदन, मुरारी कहलाते हो गिरिवर धारी ।
ध्यान धरा मीरा ने गिरिधर गोपाला, आए श्याम सुन्दर विष अमृत कर डाला।
किस नाम से पुकारूँ तुमको हे देवकी नंदन वसुदेव के लाला ।
कहे रसिया कहे छलियाँ, घनश्याम मुरली वाला कहतीं है ब्रजबाला ।
परब्रह्म ,परमेश्वर, परमात्मा, विश्वात्मा अच्युत, अभेद्य, अगाध , आपार
हे कृष्ण ! तू कितने विशाल नाम वाला ।
मनमोहन चितचोर मनमीत हे गैया चराने वाला ।
छछिन भरी छाछ पर ब्रज बाला की
नाचता है बनके नंद लाला।
हे कृष्ण ! आखिर तुम क्या हो ?
चुम्बक हो तुम ! सबको अपनी ओर खींच लेते हो।
काले होकर भी श्याम सुन्दर कहलाते हो।
हे घनश्याम, घनश्याम बन बरसो अब ।
हे कृष्ण तरसना इस ह्रदय का बंद होगा कब ।
एक बूँद तेरे दरस की भिगो जाएगी मन मेरा ।
एक बार हो जाऊं श्याम ह्रदय से तेरा।
एक नज़र भर देखी मूरत तुम्हारी।
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी ।
यही है तुमसे विनती हमारी।
न हो दूर हमसे हे कृष्ण मुरारी ।
सदा साथ हो तुम ,सदा पास हो तुम।
अहसास हो यही सदा साथ हो तुम।
मूरत जिसने तेरी मन में बसा ली ।
हे कृष्ण ! उसने यह दुनिया गवां ली।
हे कृष्ण ! मैंनें जाना तुम चुम्बक हो।
मन से देखे जो तुझको तेरा हो जाता है।
खो गया जो एकबार तुझ में फिर सब बेमायने हो जाता है।
अनीता सोनी चेन्नई
स्वरचित मौलिक रचना
