‘ नव वर्ष में हिन्दी दिवस’

अभी अभी तो नव वर्ष की ले रहे बधाई ।
शुक्र मनाकर हाथ जोड़कर दी 21 को विदाई ।।
फिर बजाया कोरोना ने डंका तीजी लहर है आई।
हाथ उठाकर ऊपर वाले को देने लगे दुहाई ।।
दूर हटो सब दूर हटो न कोई पास में आए ।
तेजी से फैल रहा संक्रमण कैसे इसे हटाए ।।
चाची सबसे कहती चबूतरे पर कोई न आए।
चाची का चबूतरा भी अब हम ऑनलाइन चलाए ।।

सब के फोन पर ऑनलाइन मिटिंग का लिंक भेज दिया गया । शाम को 4 बजे मीटिंग शुरू हो गई अपने अपने घरों में सभी बच्चे फोन या लेपटॉप पर बैठे है। चले हम भी देखते है क्या चल रहा है ऑनलाइन मीटिंग में यह तो चाची की आवाज लगती है ।“ सभी अपना माइक म्यूट रखेंगे केवल अपनी बात कहने के लिये अनम्यूट् करेंगे वैसे तुम सब जानते हो बच्चों , तुम्हारी चाची तो पहली बार ऑनलाइन मीटिंग कर रही है। मुझे भी तुमसे कुछ सीखने को मिलेगा । एक एक करके सभी एंटर हो गए है । हार्दिक कुछ कहना चाहता है शायद इसीलिए बार बार अपनी उंगली उठा रहा है ।
हाँ बोलो हार्दिक “चाची…… क्या आप भी पढ़ाएंगी ?”
“नहीं नहीं हम तो आपस में बातें करेंगे हमेशा की तरह”।
“ तो आज कुछ नया बताओ न” सुहानी ने कहा ।
“आज 10 जनवरी है और आज का दिन कहलाता है ‘ विश्व हिंदी दिवस ’ या ‘ अन्तरराष्ट्रीय हिंदी दिवस ’ कहलाता है।”

“ परन्तु हमने 14 सितंबर को भी हिंदी दिवस मनाया था और आज फिर से …….. हिंदी…….दिवस”। कुछ हैरानी से कुशाग्र ने पूछा ।
“ हाँ भई ! ये भी तो जानना जरूरी है ।” तब चाची ने बताया कि 1975 में नागपुर में पहली बार हिंदी का अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन रखा गया जिसमें दुनिया के कई देशों ने भाग लिया जिसका उद्घाटन प्रधान मंत्री श्री मति इंदिरा गांधी ने किया । सन् 2006 में हिंदी का प्रचार दुनिया भर में करने के लिए पूर्व प्रधान मंत्री श्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को ‘ अन्तरराष्ट्रीय हिंदी दिवस’ घोषित किया। सारे विश्व में हिंदी के प्रचार के लिए सम्मेलन होने लगे । इस तरह 10 जनवरी विश्व हिंदी दिवस बन गयाऔर तब से इस दिन कुछ न कुछ ऐसे कार्य क्रम शुरू किए जाते है जिससे अधिक से अधिक लोग हिंदी के प्रति आकर्षित हो तथा हिंदी सीखें । इसलिए आज हम कुछ नया करेंगे ।
“पर हम सब तो ऑनलाइन में है।” अपना सिर झटका कर बालों को पीछे करते हुए पिंकी ने पूछा ….
“ हम ऑनलाइन में ही करेंगे…..” चाची बोली….बच्चों की उत्सुकता बढ़ी और सभी ने अपने को अनम्यूट कर लिया और एक अजीब सा डिजिटल शोर होने लगा चाची अपने फोन से तुरंत सबको म्यूट कर दिया । एक दो मिनट तक तो किसी को यह अहसास ही न हुआ कि केवल उनके मुंह हिल रहे हैं आवाज तो सुनाई ही नहीं दे रही तो अगड़म बगड़म से हाव भाव का स्क्रीन शौट चाची ने ले लिया जो एक हास्यास्पद सी तस्वीर बन गई।
“ आज मैं तुम्हें एक कविता सुनाती हूँ जो तुम सब ने एक दो साल की उम्र में अंग्रेजी की नर्सरी राइम की तरह जरूर सुनी होगी और सीखी भी होगी और आजकल छोटे बच्चों के ममी पापा अपने फोन पर लगा कर उन्हें खाना खिलाते है। अंग्रेजी राइम
‘एन ओल्ड मैकडोनाल्ड हैड ए फार्म……ई आ ई आ ओ’ का हिंदी अनुवाद सुनाती हूँ ।” जिसको अन्वी और वियारा खूब सुनती है आजकल।
Oh wow interesting…..शरारती नमन ने झट से अनम्यूट करके कहा और तुरंत म्यूट कर लिया । सारा ने भी अपनी चुटिया हिलाते हुए आँखे गोल घुमाते हुए कहा ,”जल्दी सुनाओ न चाची मुझे डांस करना है।” “ तो बच्चों आज की कविता
का शीर्षक है……
‘ साहू काका का खेत’
साहू काका का इक खेत । ई आ ई आ ओ….
खेत में रहती है कुछ गैया ।। ई आ ई आ ओ……
देती दूध और खाती चारा । ई आ ई आ ओ…..
मांउ मांउ मांउ कर रंभाती ।। ई आ ई आ ओ…..
साहू काका का इक खेत ।। ई आ ई आ ओ…..
काका के खेत में रहती भेड़े । ई आ ई आ ओ…..
बा बा बा बा करती चरती ।। ई आ ई आ ओ……

भेड़ के बाल से बनती ऊन । ई आ ई आ ओ…….
साहू काका…………………. ।। ई…………….
खेत में रहती है कुछ बिल्लियां । ई आ ई आ ओ…….
दौड़ दौड़ कर चूहे खाती ।। ई आ ई आ ओ…..
म्याऊ म्याऊ म्याऊ कर मिमियाती । ई आ ई आ ओ…..
साहू काका इक खेत ।। ई………………..
खेत में रहते है कुछ कुत्ते । ई आ ई आ ओ….
भौं भौं भौं भौं कर कर भौंकें।। ई आ ई आ ओ…..
साहू काका…………….। ई………………..
खेत में रहते है कुछ घोड़े । ई आ ई आ ओ…….
नींहः नींहः नींहृः कर हिन्नातें ।। ई आ ई आ ओ……..
साहू काका………………. ई………….
काका के खेत में मुर्गी खाना । ई आ ई आ ओ………

देखो कितने सारे चूज़े ।। ई आ ई आ ओ……..
चिक चिक चिक शोर मचाते । ई आ ई आ ओ……..
इधर चिक उधर चिक सभी ओर चिक चिक।। ई आ ई आ ओ………
साहू काका ……………… ई………….
खेत में रहती है जी बतखें । ई आ ई आ ओ……
क्वेक क्वेक क्वेक क्वेक करती दौड़े ।। ई आ ई आ ओ…..
साहू काका आवाज लगाते । ई आ ई आ ओ……
साहू काका आवाज लगाते ।। ई आ ई आ ओ…….
शोर मचाते दौड़े आते । ई आ ई आ ओ……
चिक चिक चिक चिक , मांउ मांउ मांउ , क्वेक क्वेक क्वेक, नींहः नींहः नींहः ,बा बा बा

भौं भौं भौं, म्याऊ म्याऊ म्याऊ, चिक चिक चिक क्वेक क्वेक क्वेक………..

‘ सेंटा क्लॉज़ ‘

दिसंबर का महीना चल रहा है। चेन्नई का बेहतरीन मौसम तड़के उठने पर मीठी सी ठंड तन को बहुत सुहाती है। इस बार मेघ खूब बरसे , आहते में खरपतवार की भरमार है। पत्तों का झड़ना तेज हो गया है। सुबह तो आहते में जैसे पत्तों का कालीन बिछा है। मौसम का आनंद लेने के लिए अधिकतर लोग सुबह की सैर पर निकले नजर आ रहे है। कोरोना की दूसरी लहर खत्म होने के बाद लगभग सभी लोगों को वैक्सीन लग चुकी है , बच्चों के स्कूल भी खुल से गए है, लोगबाग घूम फिर भी रहे है। शादी-ब्याह भी धूमधाम से संपन्न हो गए है। 2021 का कार्यकाल बड़े दिनों की छुट्टियों के साथ अपने समापन समारोह की इंतजार में है कि सरकार की तरफ से सामूहिक समारोह बैन कर दिए गए है , क्योंकि ऑमिक्रॉन के नाम से कोरोना की तीसरी लहर चल चुकी है । भारत की तरफ बढ़ रही है। सबके चेहरे मॉस्क से ढक गये है। घरौंदा सोसाइटी में भी नववर्ष का समारोह भी रद्द कर दिया गया है ।पर चाची के चबूतरे की रौनक फिर भी बरकरार है।
आज 24 दिसंबर की शाम है। बच्चों को इंतजार है ‘क्रिसमस ताता’ यानि ‘ सेंटा क्लॉज़ ‘ का ,पर सारे कार्य क्रम तो ठप्प हो गए है बच्चों का मुंह उतरा हुआ सा है। फिर भी चाची से बच्चों की आस बंधी है। रोजर ,जॉन ,टीना और पिंकी के घरों में बहुत सुन्दर क्रिसमस ट्री के साथ रंग बिरंगी बतियों वाले बड़े बड़े सितारे भी चमक रहे है।

चाची के पूछने पर रोजर, जॉन, टीना और पिंकी ने बताया कि उनके घरों में क्रिसमस की कैसी तैयारी चल रही है। केक कुकीज तो सभी के घर में बेक हो रहे है इसके अलावा चाकलेट मिठाई व नमकीन भी बनाए जा रहे है। रात 12 बजे वे सभी सामुहिक प्रार्थना के लिए गिरजा घर जाएंगे सबको मैरी क्रिसमस करेंगे और बहुत से हिम गीत गाएंगे। कल भी सारा दिन सबसे मिलना खाना पीना मजा करना रहेगा। सब बच्चे सुन तो रहे थे पर उनके लिए तो क्रिसमस के मायने ‘क्रिसमस ताता’ से मिलने वाले उपहार ही थे , पर अभी तक कुछ नज़र नहीं आ रहा था। तभी सामने से दो बच्चे भागते हुए आ रहे थे कुछ घबराए हुए लग रहे थे। चाची के पूछने पर उन्होंने बताया कि वह सोसाइटी के चौकीदार के बच्चे है , और उनके पिता को कुछ हो गया है , वे सामने वाले हॉस्पिटल में भर्ती है परंतु अस्पताल वाले कह रहे है कि पहले पैसा भरो तभी इलाज करेंगे। समय की गंभीरता को देखते हुए चाची जल्द ही हॉस्पिटल की तरफ गयी बच्चे भी संग हो लिए। जाकर देखा तो पाया कि सोसाइटी का नया चौकीदार ‘सेंटा क्लॉज़’ के कपड़े पहने हुए स्ट्रेचर पर बेहोश सा पड़ा लग रहा है, इधर उधर से डाक्टर नर्स आ जा रहे है परन्तु उसकी तरफ कोई नहीं देख रहा । उसको देखते ही चाची रिसेप्शन की तरफ भागी उन्होंने साफ ही कहा कि पहले 1,5000 रूपये जमा कराएं तभी इलाज शुरू किया जाएगा चौकीदार की हालत को देखते हुए बहस में
समय बर्बाद न करके उन्हें अपना नाम पता दिया तथा उनसे प्रार्थना की “मैं अभी पैसे भरती हूँ कृपया आप इसका इलाज शुरू करें।”
आठ साल की करिश्मा और छः साल का गुड्ड आंसू भरी आँखो से अपने पिता को अन्दर जाते हुए देख रहे थे। दोनों बच्चों को ढाढ॔स बंधाते हुए चाची ने जब उनकी माँ के बारे में पूछा तो बच्चों की रुलाई फूट पड़ी रोते हुए उन्होंने कहा कि पिछले साल कोरोना में उनकी माँ मर गई। उनकी बात सुनकर मन भर आया पास खड़े बाकी बच्चे भी सहम से गए। हम अभी आते है कहकर बच्चे वहाँ से भागे चाची अपने फोन पर कुछ कर रही थी कि उतनी ही देर में सभी बच्चे हाथ में अपनी अपनी गुल्लक पकड़े हुए चाची के पास दौड़े आए और चाची को देते हुए कहने लगे, “ चाची आप हमारी गुल्लक के सारे पैसे लेकर जमा करवा दें

I have 4 to5 ‘k’ in my piggy bank and everyone has some हम लोग easily 15000 रूपए जमा कर सकते है। नमन ने कहा
“चाची ने बच्चों को प्यार से शाबाश देते हुए कहा कि अभी तो पैसे जमा करवा दिए है अगर और आवश्यक होगा तो तुम्हारी मदद लेंगे अभी तुम लोग जाओ हॉस्पिटल वाले गुस्सा कर रहें है।“ , “promise चाची” सभी ने एक आवाज में पूछा, “ हाँ हाँ पक्का “ कहकर सबको भेजा तो नर्स ने आकर कहा कि,”आपको डॉक्टर साहब बुला रहें है।“
डॉक्टर से बात करने पर पता चला कि चौकीदार के सिर पर गर्मी चढ़ जाने की वजह से रक्तचाप बढ़ गया और वह गिर पड़ा शायद किसी ने प्राथमिक चिकित्सा के चलते उनके सिर पर पानी डाल दिया इस लिए उनका बचाव हो गया अन्यथा कुछ सीरियस हो सकता था । अभी आप उनसे मिल सकती हैपर हॉस्पिटल से छुट्टी कल ही मिलेगी आज की रात उन्हें देख रेख में ही रहना ठीक रहेगा।

निरीह आँखो में सहमा सा सवाल लिए कस के गुडडु का हाथ पकडे करिश्मा चाची के साथ अपने पिता को देखते ही उनसे लिपट गए और तीनों की आँखो से अश्रु धारा बह निकली इस मार्मिक दृश्य को देख कर चाची भी भावुक हो गई……..। पूछने पर चौकीदार ने बताया कि इस हफ्ते उसकी नाइट ड्यूटी चल रही थी। किसी दोस्त ने कहा कि लम्बे चौड़े दिखते हो पास की मॉल में सेंटा क्लॉज बन कर घूमना है और बच्चों को चाकलेट बांटने है । 500 रूपए रोज मिलेंगे चार दिन की बात है 2000 रूपए कमा लोगे , वैसे भी नाइट चल रही है । “क्या कहूँ बस इसी लालच में आ गया माँ…वह मोटी सी पोशाक टोपी और लम्बी सी दाढ़ी लगाकर कभी अन्दर कभी बाहर करते हुए सिर पर गर्मी चढ़ गई और ……….और… गिर गया फिर कुछ पता ही नहीं यहाँ कौन लाया किसने सोसाइटी में इत्तला की मुझे कुछ मालूम नहीं आप लोगों ने बचा लिया किस मुंह से आपका धन्यवाद करूं वैसे ही ये बिन माँ के बच्चे…. है…….कहते हुए उसकी आँखे भर आई।“
सब सुन कर चाची ने उसे ढाढ॔स बंधाया और कहा,”अभी तुम आराम करो कल छुट्टी मिल जाएगी बच्चों को मैं देख लेती हूँ तुम्हें अस्पताल से खाना मिल जाएगा कल मिलते है।

अंधेरा हो गया था पर बच्चे अभी चबूतरे पर थे चाची को देखते ही सब पूछने लगे तो चाची ने कहा अभी चौकीदार ठीक है पर…..पर….” “पर क्या चाची जल्दी बोलो न ….” अधीर सा शोर और सभी बच्चे अपने हाथों में रंग बिरंगे कागजो में लिपटे उपहार करिश्मा और गुडडु को मैरी क्रिसमस कहते हुए देने लगे ।
पर बच्चों तुम्हारा सेंटा तो नहीं आया …..पर आज तो तुम लोग चौकीदार के और इन बच्चों के सेंटा क्लॉज़ बन गए तुम सबको बहुत बहुत शाबाश और मैरी मैरी क्रिसमस !! भगवान तुम सबको बहुत खुश रखे और इसी तरह एक अच्छा इन्सान बनाए कल मिलेंगे।

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‘बालदिवस‘

पिछले सप्ताह हुई बारिश ने काफी हद तक चेन्नई में बाढ़ के हालात पैदा कर दिए थे। चाची का चबूतरा भी जलमग्न था।धीरे धीरे चबूतरे का पानी सूख रहा है ,पर फिर भी कीचड़ दिखाई दे रहा है।औरआज बाल दिवस पर चाची और बच्चों का कोई कार्यक्रम न बना हो कैसे हो सकता है! किसी तरह से बरगद पर बने चबूतरे को धो पोंछ कर बैठने लायक बना दिया गया है। लगता है कुछ खास ही हो रहा है।वाहअलगअलग किरदारो के लिबास में बच्चे दिखाई दे रहे है।बच्चों के रंग-बिरंगे लिबास ने खूब रंग बिखेर दिया है।वाह वाह यहाँ तो फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता हो रही है।सबसेआगे मित्रन अपनी स्कूल यूनीफॉर्म में हाथ में साइन बोर्ड उठाए जिस पर लिखा है 14 नवंबर बाल दिवस हैप्पी बर्थ डे चाचा नेहरू पीछे काली अचन पर लाल गुलाब लगाए चाचा नेहरू चले आ रहे है। बहुत बढ़िया तरीके से बालदिवस का कार्यक्रम शुरु हो गया।ये क्या गांधी जी तो अपने चेहरे से बड़े से चश्मे अपनी नाक पर टिकाए हुए जिन पर स्वच्छभारत के स्टिकर लगे है,एक हाथ से चश्मे संभालते हुए दूसरे हाथ से लाठी टेकते हुए सीधे दांडी यात्रा से चले आ रहे है।अरे वाह ये कौन, ये तो सुन्दर बन ही चला आ रहा है कला बाजी मारते हुए मोगली के पीछे बघिरा,भालूअंकल,शेरखान कालू हाथी,लोमड़ीआंटी, अपना घोंसला संभाले बया चिड़ियाभारी वर्षा के चलतेअपनी घरौंदा सोसाइटी भी कुछ कुछ जंगल जैसी लग रहीहै।इन सबके पीछे ये कौन चलाआरहा हैआधी बाजू का कुर्ता पहने सफेद बाल बिना रिम का चश्मा पहने लम्बी सी सफेद दाढ़ी वाले बाबा……भईये तो अपने प्रधानमंत्री मोदी जी है ।देखे तो जराआगे क्या होने वाला है।मोदी जी तो भाषण देने लगे,!

“मेरे देश के प्यारे बच्चों तुम सबको बाल दिवस की बहुत शुभकामनायें तुम भविष्य हो इस देश के बस एक ही बात कहूंगा खूब खेलो परउतना ही दिल लगाकर पढ़ो अपनेआस पास साफ-सफाई रखो पेड़ पौधे की सुरक्षा करो ताकि पर्यावरण सुरक्षित हो सके और सबसे बड़ी बात अपना काम स्वयं करो तोआज की कविता का शीर्षक है‘ अपना काम स्वयं करो’……………

अपना काम स्वयं करो’

   देख गेंहू  का  खेत  वहींपर  थम  गई  चिड़िया रानी ।

  यहीं  बुनूगीं  नीड़  मैं  अपना  उसने  मन  में   ठानी ।।

जोड़ जोड़  के  तिनका  तिनका  अपना  नीड़  बनाया ।

 अंडे देने  का  समय  अब  निकट  था  आया ।

नीड़   में  बैठी  अंडे सेंके   प्यारी   चिड़िया  रानी ।

    नर   चिड़िया  तो   बीन   के   लाए   घर   में   दाना  पानी ।।

फूटे   अंडे   चूज़े   निकले   चूं चूं   चूं चूं   करते।

हरे   भरे   लहरा   उठे   थे   खेत   गेंहू   से   भरते ।।

हरे   भरे   जब   खेत   गेंहू   के   होने   लगे   सुनहले ।

  चूज़ो   के   भी   पर   लगे   थे   उगनेरूप रूपहले ।।

देख   पकी   बालें   गेंहू    की   था   किसान   हर्षाया ।

खेत   काटने   का   समय    अब   निकट    है   आया ।।

 भोर   भई    जब   गई    थी   चिड़िया   रानी   दाना   लेने ।

चूं चूं   चीं चीं   करते बच्चे    बैठे   नीड़   में   नीड़   में   खेलें ।।

सुन   किसान    की   बातें   बच्चे   थे   डर   से   डोले ।

काटना   है   कल   खेत   हमारा   यह   मित्र    से   बोले ।।

चिड़िया   रानी   दूर   दूर   ले   चुग  चुग   दाना   लाई  ।

सुन    बच्चों   की   बात   ज़रा   भी   चिड़िया   न    घबराई ।।

मित्र   कभी   और   कभी  पड़ोसी   कभी   नातेदार    को   लाया ।

    हाँ  हाँ   करके   सभी   गए    पर   खेत    काटने   कोई   न   आया ।।

हंसिया   पकड़े   आज   हाथ   संग   बेटे   को   वो   लाया ।

    कल    से   मिलकर    कैसे   काटे   खेत    उसे   समझाया  ।।

आज   सुनी   बच्चों    की   बातें   चिड़िया   थी   मुस्काई ।

   कल   से   सभी   चलेंगे   चुगने   अपना   दाना   भाई  ।।

भोर   होने   से   पहले   ही   सब   बच्चे    उठकर   कर   आए ।

फड़  फड़     करके   सबने   अपने   पंख    थे   खूब     फैलाए ।।

    चीं  चीं  चीं चीं करते   करते   उड़   गए    दूर   गगन   भेंट ।

सूरज   राजा    खोल   पिटारा   बैठा   पूरब   बन   में  ।।

  सुन    कहानी   चिड़िया   किसान   की   क्या    सीखा   तुमने   बच्चों  ।

     जीवन    में   आगे   बढ़ना   तो  अपना   काम   स्वयं   करो  ।।

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‘  हिंदी दिवस ‘

मौसम खुशगवार है। आसमान मैं बादल छाये है कभी हल्की सी बूंदाबांदी तो कभी कहीं से बादलों के परदे को फाड़ते हुए एकदम आँखों को चुंधियाती सी धूप ऐसे निकल आती है, जैसे कह रही हो कि मेरे अस्तित्व को चुनौती देना इतना आसान नहीं पर फिर धीरे धीरे बदली घिरने लगती है और शनैः शनैः मद्धिम पड़ती धूप को कह रही हो कि मैं तो तुमसे आँख मिचौनी खेल रही हूँ अगर अपनी मौज में आ जाऊँ तो तीन तीन दिन तक तुम्हारा दर्शन भी नहीं होने देती, और फिर से बादलों को धकेलती हुई धूप चमकते हुए कहती है, तुम जितना ज्यादा घिर कर आओगे मैं उतना अधिक चमक कर आऊंगी। बादलों और धूप की लुका छिपी में शीतल मंद बहती बयार तन को सुख देती हुई मन को भी लुभा रही है। खुशगवार मौसम ने मूड को भी खुशगवार बना दिया है।����


मौसम का आनंद उठाने के लिए आज चाची समय से पहले चबूतरे पर बैठी अपनी मस्ती में कुछ गुनगुना
रही है । बस कुछ ही देर में बच्चे भी चबूतरे की तरफ दौड़ते नज़र आए। अचानक सभी बच्चों को अपनी तरफ
दौड़ते हुए आते देख कर चाची को हर्ष हुआ और कुछ अचंभा भी क्योंकि बच्चों के हाथों में फूल कार्ड इत्यादि
पकड़े हुए है । “ अरे भई क्या बात है आज इतने सारे फूल और कार्ड आज तो मेरा जन्मदिन नहीं है बच्चों !”
चाची ने हंस कर कहा । चाची को फूल इत्यादि पकड़ाते हुए सभी बच्चे एक ही स्वर में गाते हुए बोले, “ हैप्पी
टीचर्स डे” “ हम आपको टीचर्स डे के लिए विश कर रहे है , आप हमको कितनी अच्छी कहानियाँ कविताएँ और
कितनी अच्छी अच्छी बातें सिखाती है इसलिए आप भी हमारी टीचर हैं।“ “ भई आज तो बच्चों ने चाची को बहुत
खुश कर दिया मेरे प्यारे बच्चों का बहुत धन्यवाद देखो मैं भी आज केक बना कर लाई हूँ , पर पहले बताओ कि
शिक्षक दिवस 5 सितंबर को क्यों मनाते है? “ सबसे पहले चाची की नज़र बातूनी नमन की तरफ गई “ ओह यू मींस टीचर्स डे “ चेन्नई के बच्चों को हिंदी बोलने में अक्सर मुश्किल होती है पर चाची के चबूतरे पर हिंदी में बात करना जरूरी है , फिर भी बच्चे अंग्रेजी में बात करते जिसके लिए चाची उन्हें बार बार टोकती पर नमन अक्सर अंग्रेजी में ही बात करता है। हालांकि कई तमिल भाषी भी चबूतरे पर आने से हिंदी में बात करना
सीख रहे है और पसंद भी करते है । चाची के साथ हिंदी बात करने में मज़ा भी आता है । अपनी बात को पूरी करते हुए नमन अंग्रेजी में बोलने को शुरु हुआ तो चाची की ना की मुद्रा में हिलती गर्दन को देखकर कहने लगा ,


“ओके ओके आई विल स्पीक इन हिंदी, 5 सितंबर भारत के दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली डा० राधाकृष्णन का जन्मदिन है। जिसे टीचर्स डे आई मीन ‘शिक्षक दिवस ‘ के रूप में मनाया जाता है। उनका जन्म ईयर 1888 को तमिलनाडु के तिरतनी कस्बा में हुआ था । वे बहुत ऐजुकेटिड थे , तथा पढ़ाई में उनको बहुत इंटरेस्ट थी । वे चाहते थे कि हमारे देश के सभी बच्चे बहुत पढ़ाई लिखाई करें । उन्हें भारत रत्न सम्मान प्राप्त था। उन्हें और भी कई विदेशी अवार्ड मिले थे । जय हिंद “ नमन को रटे हुए निबंध को बोलते देख कर सबको हंसी आ गई। अपनी हंसी को थामते हुए चाची ने नमन को बहुत शाबाश दी और कहा कि नमन की जानकारी बिल्कुल सही है इसलिए नमन को
डबल केक मिलेगा। तभी हार्दिक ने कहना शुरू कर दिया ,” डा० राधाकृष्णन मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ते थे । बाद में वे मद्रास के प्रेसीडेंसी कॉलेज के प्राचार्य बने और फिर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के कुलपति बने ।“ चाची को ताली बजाते देख सभी ने जोर से तालियाँ बजाई और सब मजे से केक खाने लगे ।


सभी बच्चे अपने कानों पर ��मॉस्क लटकाए मस्ती करते हुए केक का मजा ले रहे थे कि, बीच में नैपकिन से अपना मुहँ पोंछते हुए सारा बोल उठी “चाची अब कहानी सुनाएं न अभी तो टीचर्स डे खत्म हो गया ।“ कानों के ऊपर लटकते लम्बे पोनी टेल और बडी बडी आँखो वाली प्यारी सी सारा ने जब अपनी धीमी सी आवाज में पूछा तो
बाकी सब बच्चे भी उसकी हाँ में हाँ मिलाने लगे। चाची ने कहा ,” 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस है ।तुमको मालूम है कि हिंदी भाषा भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। फिर भी यह कम हो रही है क्योंकि हमारे देश के बड़े शहर में रहने वाले लोग अपने बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाना और अंग्रेजी में बात करना पसंद करते है । “ तभी सौरव ने पूछा कि,” हिंदी तो हमारे देश की मुख्य भाषा है तो फिर हिंदी तो हमारी राष्ट्रीय भाषा होनी
चाहिए।“ “हाँ होनी तो चाहिए परन्तु 1949 में जब भारत का संविधान लिखा जा रहा था तो अंग्रेजी के बढ़ते प्रसार को
देखते हुए हिंदी को भारत की राष्ट्रीय भाषा घोषित करना चाहते थे, पर दक्षिण भारत में इसका विरोध किया गया इसलिए भारत का संविधान हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखा गया और हिंदी को राष्ट्रीय भाषा न बनाकर 14 सितंबर 1949 को राज भाषा का दर्जा दिया गया तभी से भारत भर में 14 सितम्बर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है। हम हिन्दुस्तान में रह कर यदि हिंदी नहीं सीखे या बोलेंगे तो आने वाले समय में हिंदी और कम होती जाएगी और यह बात हमारी संस्कृति को भी कमजोर बनाएगी । और एक पते की बात बताती हूँ , जब मैं यूरोप घूमने गई तो पता लगा कि फ्रांस में तो बिलकुल भी अंग्रेजी नहीं बोली जाती वहाँ लोग केवल फ्रांसिसी भाषा बोलते है , जर्मनी में भी लोग जर्मन भाषा को ही प्राथमिकता देते है । परन्तु भारत में हिंदी बोलने वाले को हीन दृष्टि से देखा जाता है , कई अंग्रेजी मिडियम स्कूलों में नियम है कि अंग्रेजी छोड़ कर किसी और भाषा में बात करने पर जुर्माना भरना पड़ता है । हमें किसी भाषा का अपमान नहीं करना चाहिए परन्तु अपनी ‘ राज भाषा हिंदी’ का सम्मान करना चाहिए ताकि आने वाले समय में हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा दिया जाए । इस हिंदी दिवस पर सब बच्चे प्रण करते है कि हम सब हिन्दी पूरी तरह सीखेंगे और बोलेंगे ।“ कहकर चाची ने नमन की तरफ देखा चाची को देखते ही नमन कहने लगा ,” yes yes I understood I will speak in hindi” उसके चुप होते ही सब जोर से हंसने लगे तो उसे समझ आया अपने सिर पर थप्पड़ मारने हुए उसने कहा ,” ओ माफी……… माफी
मैं…… आगे से हिन्दी में …… बात करूंगा ही ही ही ही चबूतरा हंसी से गूंजने लगा । चलो अब हम अंग्रेजी के
कैलेंडर से हिन्दी में महीनों के नाम सीखेंगे । तो आज की कविता के संग सारा अभिनय करके दिखाएगी क्यों सारा ? सारा
खुशी से अपनी दोंनो चुटिया हिलाते हुए उठ खड़ी हुई ������

बाल कविता हिन्दी का पंचांग


आओ बच्चों प्यारे बच्चों आज नया एक खेल खिलाए ,
अंग्रेजी के कलैंडर से हिन्दी का पंचांग सिखाए ।
मार्च महीना जब भी आए परीक्षा अपने संग में लाए,
हिन्दी का नव वर्ष कहाए मौसम तन को खूब सुहाए,
ये तो चैत्र मास कहलाए ।
अप्रैल का जब आए महीना नयी कक्षा का चढ़ जाए जीना,
खेती में हो शुरु कटाई ग्रीष्म ऋतु की आहट आई ,

महीना यह बैसाख का भाई ।

महीना जब मई का आए गर्मी की छुट्टियाँ हो जाए,
नानी के घर खुशी से जाए प्यारे नाना आम खिलाए,
ये तो जेठ मास कहलाए ।
आया है अब जून महीना सूरज खूब फुलाए सीना,
झर झर बहता खूब पसीना ठंडा ठंडा शर्बत पीना,
ये तो है आषाढ़ महीना ।

अब आया है मंथ जुलाई स्कूल खुले और शुरु पढ़ाई,
किसान खेत में करे बुआई काली घटा अंबर पे छाई ,
आया सावन झूम के भाई ।
अगस्त महीना जब भी आए आजादी का दिवस मनाए
पानी बरसे छम छम छम बिन छाते न निकले हम,

ये तो भादों मास कहलाए ।
आया है अब मंथ सितंबर छमाही में कितने नम्बर,
धरती पर हरियाली छाई पूजा की छुट्टियाँ भी आई,
ये तो अश्विन मास है भाई ।

अक्तूबर का मास है आया दिवाली अपने संग में लाया,
जग मग जग मग दीप जलाएँ भर भर पेट मिठाई खाए,
ये तो कार्तिक मास कहलाए ।
नवंबर मंथ में बजे शहनाई शादी का मौसम है भाई ,
अच्छी न अब लगे पढ़ाई शिशिर ऋतु भी मांगे विदाई ,
मार्गशीर्ष ये मास है भाई ।
दिसंबर के संग जाड़ा आता पारा दिन दिन गिरता जाता,
भूनी मूँगफली मन को भाए क्रिसमस की छुट्टियाँ खूब ।मनाए

, यह तो पौष मास कहलाए ।
आई जनवरी सेंके आग सूरज देव दिखे न खास ,
मन चाहे बस ओढ़ रजाई तिल गुड़ खाते जाए भाई,
ये तो माघ मास है भाई ।

फरवरी के संग आए बसंत खिलें फूल और उड़े पतंग ,

मौसम में है मस्ती छाई होली आई होली आई ,
ये तो फागुन मास है भाई ।
तो देखा प्यारे बच्चों कितना मजा आज है आया खेल खेल में पाठ पढ़ाया,
अंग्रेजी के कैलेंडर से हिन्दी का पंचांग सिखाया ।
हिन्दी है भारत की शान , हिंदी तो है हिंद की आन ।
हिंदी तो हमारी जान , हिंदी का हम करेंगे मान ।
जय जय हिंदी जय जय हिंद, जय जय हिंदी जय जय हिंद ।

‘राखी के आफ्टॅर इफैक्ट्स’

‘राखी के आफ्टॅर इफैक्ट्स’

वैक्सीन लगाने के बाद कोविड 19 की दहशत कुछ कम हुई है। हालांकि तीसरी लहर की चेतावनी भी जारी है, फिर भी मॉस्क लगाए और वैक्सीन लगाए लोग कोरोना से मुकाबला करने को तैयार है। राम भरोसा तो हम भारतीयों का सदा बरकरार रहता ही है। आज चाची के चबूतरे पर भी रौनक लौट आई सी लगती है।सभी सखियाँ अभी भी राखी के मूड में ही दिखाई दे रही है। सब अपनी बात  बताने में व्यस्त कि किसने कैसे मनाई राखी।

संगीता कहने लगी,“ इस बार तो हम बहन भाईबड़े भैया के घर पर ही इकठ्ठे हो गए थे। एक अरसे के बाद सब बहन भाई  एक दूजे से मिले सबके बच्चे भी आ गए थे वैसे भी रविवार था किसी को काम पर जाने की कोई जल्दी नहीं थी, राकेश भी अपनी दीदी से राखी बंधवा कर वहीं आ गए थे। सब इकठ्ठे हों और ताश की बाजी न लगे हमारे मेंपरिवार ऐसा हो ही नहीं सकता। भाभी और उनकी बहू ने बहुत स्वादिष्ट खाना बनाया था।सारा दिन कहाँ बीता कुछ पता ही  न चला। हम बड़े तो ताश में लगे रहे और बच्चे अपनी धमाचौकड़ी अलग मचाते रहे, वे सब भी कितने समय के बाद मिले थे।“  संगीता के चुप होते ही मोना ने अपना कान दिखाते हुए कहा,”ये देख भैया ने दिए हीरे के बूंदे  थोड़े छोटे है पर कैजुअल वेयर के लिए बढ़िया है। मैंने तो  भैया से पहले ही कह दिया था कि इस बार मुझे कुछ अच्छा चाहिए पिछले साल का मिला कर।” “फिर तुम क्या लेकर गयीं।“ रुपा ने पूछा  तो इससे पहले कि मोना कोई जवाब देती कि कुसुम अपनी कहने लगी।

“मैंने तो भैया को यही बुला लिया था भाभी बच्चों को लेकर अपने भाई के घर गयीं थी हमने सारा दिन खूब एन्जॉय किया जोमेटो से खाना मंगाया अच्छी सी मूवी देखीNetflix पर , और हाँ अपना लेन देन तो स्टैंडर्ड का होता है हम जो भी हो एक दूसरे को ब्रैंडिड ही देते है। हमारा सामान एक दूसरे से इक्कीस होता है उन्नीस नहीं मेरी ममी तो बचपन से यही कहती थी स्टैंडर्ड मेनटेन करो। और एक मेरी ननद है हर बार इतना बेकार गिफ्ट लाती है कि क्या कहें कोई स्टैंडर्ड  ही नहीं है, मैं तो इन्हें पहनने ही नहीं देती।इस बार तो हद ही कर दी शहर   में रहकर भी Amazon द्वारा राखी भेज दी, मैंने भी Amazon से लॉकडाउन क्लियरिंग सेल का गिफ्ट भिजवा दिया, जैसे दो वैसा लो…”कुसुम कुछ अधिक ही ढींग हांक रही थी उसके चुप करने की इंतजार में सबका ध्यान एक तरफ चुपचाप बैठी सुनीता पर ही टिका था । हाल ही में कोरोना की दूसरी लहर में सुनीताके ममी पापा एक सप्ताह  के अन्तराल में ही महामारी की भेंट चढ़ गए थे।

जैसे ही सुनीता से हाल पूछा तो एकदम बिफर कर रोने लगी सबने उसे किसी तरह ढाढ॔स बंधा कर चुप कराया। किसी तरह अपने मन को संभालते हुए कहने लगी,“मुझे तो ये लेना देना बेमानी लगता है,भाई बहन के रिश्ते को बहुत छोटा कर देता है। (अपनी  रुलाई को किसी तरह थामते हुए सुनीता कहने लगी) दर-असल दो साल पहले जब मैं राखी पर मायके गयी तो यूँ ही राखी के नेग में मैंने ममी का कुन्दन हार मांग लिया मुझे बचपन से ही वह हार बहुत पसंद था, और शायद भैया को भी।भैया वह हार भाभी को देना चाहते थे। बस इसी बात पर हम दोंनो भाई बहनअड़ गए ममी पापा ने काफी समझाया पर हम दोंनो ने उनकी एक न सुनी

तो पापा ने गुस्से में कहा कि अभी यह हार किसी को नहीं मिलेगा हमारे जाने के बाद जो हो सो हो। इसी गुस्से में भैया ने जो उपहार दिया उसे भी  नहीं लेकर आई।

पिछले साल तो वैसे ही सब बंद ही रहा इसलिए ममी ने हम दोंनो में मान-मनुहार करके किसी तरह विडियो कॉलिंग पर राखी मनवा दी। इस साल जो हुआ कहते कहते उसकी रुलाई छूट गईऔर आंसुओं के संग दुख व पश्चात्ताप भी बह निकला, समय इतना कुटिल हुआ  कि माता पिता केअंतिमदर्शन भी न कर सकी मन में जीवन भर के लिए अफसोस रह गया। इसलिए इस बार राखी पर भैया भाभी ने आने के लिए  कहा तो मना न कर सकी दो दिन के लिए होकरआई हूँ ।समझ ही नहीं आ रहा था भैया के लिए क्या लेकर  जाती क्योंकि भैया भाभी ने कुछ  भी लाने से मना कर दिया था।घर के बने बेसन के लड्डू लेकर गई जो भैया के लिए ममी खास बनाया करती थी । मैंने तो डरते हुए भैया को दिए। और लड्डू देखते ही उनकी आँखे भर आई, मेरे बहुत मना करने पर भी ममी का कुन्दन हार मेरे गले में पहना दिया । कहते कहते सुनीता फूट फूट कर रोने लगी।

माहौल एकदम मार्मिक हो गया सब अपनी आँखे पोंछ रहे थे। तभी चाची ने सुनीता को चुप करवाते हुए  कहा कि भाई बहन का रिश्ता कच्चे धागे की डोर से बंधा है जिसमें केवल भाव ही मुख्य है मेरे अनुसार लेना देना इसका मापदंड नहीं होना चाहिए क्योंकिकिसी भी रिश्ते को पैसे से तौला जाएगा तो वह हल्का  ही दिखेगा।इसी संदर्भ में एक कविता आप लोगों को सुनाती हूँ।

                                                                 ‘  राखीधागेकात्योहार

कच्चे धागे की इक डोर है इस नैया की पतवार ,

इस कच्चे धागे की डोरी में बंधे हुए है भाव,
नहीं मात्र ये व्यवहार है ये भाई बहन का प्यार।
पिता के मन की तसल्ली माँ के मन का चाव ।
राखी धागे का त्योहार राखी धागे का त्यौहार। ।
किस सोच में डुबी है मेरी प्यारी सी बहना ,

बता घर में बहन तेरे सब कुछ ठीक तो है ना ।
छवि पापा की उभर आई बहन के मन में सहजे में,

के पूछी बात भैया ने बहन से ऐसे लहजे में ।
दिया जब भाभी ने ननदी को प्रेम भरा ताना ,

दीदी आपकी की मर्जी का आज बना है खाना।
सुबह से आपके भैया लगा रहे थे यही गुहार ,
जो बहना को है मेरी भाता रसोई वही करो तैयार
के आएगी मेरी बहना आज है राखी का त्यौहार ।
सुनी जो बात, बहन को रुलाई सी छूट आई ,
के आज भैया के घर के हर कोने में थी उसको माँ नजर आई ।

नहीं मात्र ये व्यवहार राखी धागे का त्योहार ।
कठिन समय जो आ जाए अपने भैया के ऊपर ,
जूझ जाती है बहना भी भूलकर अपना घर-परिवार ।

भले ससुराल में कितना ही सुनने को मिले ताना ,
मगर सिर नीचा भैया का नहीं होने देती बहना ।

कच्चे धागे की डोरी में ऐसे बंधे हुए है भाव,
नहीं ये मात्र है व्यवहार राखी धागे का त्यौहार ।

समझ सके जो इक दूजे के सुख दुख वाले भाव ,
छोटे पड़ जाते है तब बड़े बड़े उपहार ।
राखी धागे का त्योहार राखी धागे का त्योहार ।

अनीता सोनी

Email anita3soni@gmail.com

                                                                                        

                           
                           राखी  धागे   का त्यौहार 
             
               
       

सावन का महीना

                                                      
 

लॉकडाउन में ढील मिली पर सरकारी आदेश है कि नियमों का पालन करते हुए बाहर निकला जाए । ठीक भी है कोरोना की दूसरी
लहर तो और अधिक भयानक थी। पर अब महीना सावन का है, बारिश का मौसम तो वैसे ही मन मोह लेता है ठंडी फुहार से तपती
धरती को तो ठंडक मिलती ही है, साथ ही सबका मन भी प्रफुल्लित हो जाता है। अगस्त का महीना है सावन की फुहारें झूले के
गीत 15 अगस्त आजादी का पर्व और बहन भाई के स्नेह का त्योहार रक्षाबंधन ,बहुत व्यस्त रहता है अगस्त का महीना । वैसे भी
आज घरौंदा सोसाइटी की रौनक कुछ अलग लग रही है । कोरोना की वजह से घरौंदा के प्रांगण में ‘चाची का चबूतरा’ भी सूना पड़ा था।
आज खूब रौनक थी पर सब के मुंह पर मास्कॅ बंधा था । सब हाथ जोड़कर एक दूसरे को आजादी की बधाई दे रहे थे। कोई किसी के
गले नहीं मिल रहा था । ऑनलाइन कार्यक्रम लाकॅ डाउन के दौरान बहुत जोर पकड़ चुका है ।घर बैठे सब काम हो रहे है पढ़ाई लिखाई से
लेकर पूजा पाठ शोक सभाएं सभी कुछ ऑनलाइन है ,सबके बंधे मुंह देखकर हंसी भी छूट रही है । पर फिर भी एक दूसरे को साकार
रूप में देखकर खुशी भी हो रही है। बरगद के पेड़ के पास तिरंगा फहराया गया राष्ट्र गान गाकर छोटे छोटे तिरंगे और लडडु सबको
बांटे गए कोरोना के चलते इस बार प्रीती भोज नहीं रखा गया । देश भक्ति का माहौल बना है और आज इतने दिन बाद सब मिले है,

कोई चाची से सावन का गीत सुनाने को कह रहा है तो कोई देश पर कुछ पंक्तियाँ सुनाने की फरमाइश कर रहा है। तभी चाची ने
कहा कि आज तो आजादी का पर्व है आज तो कुछ स्वतंत्रता से संबंधित ही कुछ होना चाहिए तो एक कविता सुनाती हूँ ।
‘ हमारा तिरंगा’
दी थी कितनी कुर्बानियाँ , तब ये शुभ दिन आया था ।
लाल किले पर पहली बार तिरंगा जब लहराया था ।
पर भारत माँ की आँखो में दुख तब भी गहराया था।
विदीर्ण हो गई छाती उसकी विभाजन की रेखाओं से,
शीर्ष पड़ा खतरे में माँ का 370 सी धाराओं से ,
आतंकवाद का साया कैसा घाटी में गहराया था ,
370 की आड़ में जैसे काश्मीर हथिया था ।
जाने कितने वीरों का खून बहा इस घाटी में ,
कई सुपूत भारत माँ के शहीद हुए इस माटी में।
35 ए और 370 को ख़त्म कर डाला है ।
दूर हटो ऐ आतंकवादी अब काश्मीर हमारा हे।
आज 74वीं वर्ष गाँठ पर माँ भारती मुस्काई है,
भारत माता के सुपूतों ने अपनी कसम निभाई है।
झंडा ऊंचा तभी रहेगा जब डंडा हो मजबूत,
आज कसम खाते हैं हम भारत मां के पूत,
कभी न आने देंगे हम काश्मीर पर आंच,
धरती का ये स्वर्ग सदा से भारत माँ की शान ।
तिरंगा नहीं मात्र इक झंडा ,
मेरी शान है ये मेरी आन है ये,
मेरे देश का सम्मान है ये मेरे राष्ट्र का स्वाभिमान है ये ।
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‘चाची का चबूतरा’

‘चाची का चबूतरा’

दादी नानी बड़ी सयानी रोज सुनाती नयी कहानी
ममी पापा  गए  काम पे  नानी  दादी  दूर  गाँव में,

बार्बी  ही मैन  इलैक्ट्रिक  रेल  बोर  हो गए अब ये खेल
टिंग टंग टिंग टंग टिंग टंग टूम, ठायॅ ठायॅ ठम ठूम ठूम ठूम

कार रेस भी ज़ूम ज़ाम ज़ूम,खेल खेल कंप्यूटर गेम कितने चैम्पियन कर दिए ढेर।
हाथों में चेहरे को टिकाए आँखों को टीवी में गढ़ाए,

बबलू  पिंकी  सोच  रहे है कोई  आकर हमें खिलाए।
अभी घड़ी ने चार बजाए बबलू  पिंकी  थे  हर्षाए ।

तुन तुन तुन  बाजे  इकतारा चाची  ने बच्चों  को पुकारा,
देख  बाग  का  नया  नज़ारा  सभी को लगता  ये  प्यारा।

बूट  कसे और  कैप  चढ़ाई  बबलू  पिंकी  हार्दिक  नीमी
समर रियान  नमन  और  गिन्नी

ऊधम मचाते  दौड़  लगाते सारे पहुँचे  बाग में  आके।
तुन तुन तुन  बोले इकतारा  लिए  हाथ में एक पिटारा

चाची ने बच्चों  को पुकारा
आओ  बच्चों  प्यारे बच्चों देखो मैं  क्या लाई

गांव गांव और शहर  शहर  में खूब घूम  कर आई
कभी गांव  में घूमें आओ कभी शहर  में जाएं

कभी  जंगल  की सैर करें  कभी पहाड़ चढ़ जाए
सुन्दर सुन्दर  कविताओं में  कई  कहानियाँ गाए।

चाची  के  चबूतरे  पर धूम मची है भाई,
आओ बच्चों  देखें  क्या  है  चाची लेकर आई।

अनीता सोनी चेन्नई
स्वरचित मौलिक रचना

‘ चाची का चबूतरा ‘

चाची का चबूतरा’ हमारे रोज मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सोच है। जीवन के कई छोटे बड़े अनुभवों पर आधारित प्रसंग, कहानी, कविता, संस्मरण इत्यादि चाची के चबूतरे की रौनक रहेगी ।
‘चाची का चबूतरा’ बच्चों के लिए कुछ विशेष है। आज के डिजिटल समय में मशीनी जिंदगी में सब कुछ होते हुए भी एक उबाऊपन सा आ गया है । उम्र का हर पड़ाव एक कुंठा लिए है ।जो कुछ नयी बात नहीं है।
महानगरों में आज के समय में बाल्यावस्था और वृद्धावस्था दोनों ही उपेक्षित है ।
अतीत की यादों पर बना वर्तमान के सवालों से सना और भविष्य के सुनहले सपनों को धरातल देने का एक प्रयास है ‘चाची का चबूतरा’। महानगरीय जीवन शैली को दर्शाती यह वह सोच है जिसमें बाल मनोविज्ञान को समझते हुए कुछ रोचक व ज्ञानवर्धक कविताएँ ‘गाती कहानियों’ के नाम से चबूतरे को मनो
रंजक बनाएगी ।
महानगरों में घर अब लोप से हो गए है ,’घर’ जिनमें कमरे भले ही दो हो पर एक छोटा सा आँगन एक छत और एक देहरी अवश्य हुआ करती थी जिस पर बना छोटा बड़ा पत्थर का चबूतरा होता था ।पूरे घर में ये वह स्थान था जिसका इस्तेमाल सबसे अधिक हुआ करता था ।सुबह सवेरे घर का पुरुष वर्ग यहीं बैठा मिलता था। चाय पीते अखबार पढ़ते राजनीतिक चर्चा करते अक्सर नज़र आ जाते थे । बाप बेटा भाई भाई कभी मन से तो कभी अनमने से इकठ्ठे बैठना हो ही जाता था ।डाक लेकर आए डाकिए का वहाँ कुछ पल बैठ कभी कभार पानी पीने के बहाने दो तीन पल यूँ ही सुस्ता लेना या फिर कोई आगन्तुक द्वारा घर का सांकल बजाकर दरवाजे के खुलने का इंतजार करते बैठ जाना , या फिर ग्रह कार्य से फुर्सत पाकर घर की महिलाओं के जमावड़े का अति प्रिय स्थान जहां पास पड़ोस की सखियों के संग मिल बैठ कर मुहँ से बतियाना और हाथों से काम करना सिलाई कढाई बुनाई और दोपहर ढलने तक मिलजुल कर खाना-पीना सीखना सिखाना प्यार दुलार रूठना मनाना ,लड़ाई झगड़े ,ताने उलाहने दो चार दिन मुहँ फेरे बैठे रहना फिर एक हो जाना। गहराई शाम में भाई लोगों के यार दोस्तों का जमावड़ा पिता व दादा को आते देख दोस्तों का उड़न छू हो जाना।

आज के परिवेश में माचिस की डिबिया जैसे फ्लैट जिनकी न कोई छत न कोई आँगन, डरा सहमा सा जीवन जिसमें सरलता कहीं छू नहीं गई। महानगरीय जीवन में पैसा भी हो और समय भी जरा मुश्किल है। इन्हीं कड़ियों को मिलाने की एक कोशिश है ‘चाची का चबूतरा’ ।
तो आए चलिए देखते है कि कैसा और कहाँ है ‘ चाची का चबूतरा ‘ !!!

बड़े शहर की छोटी सड़क उसमें है अनुराग नगर
जिसमें घरौंदा सोसाइटी एक ,बसे जिसमें परिवार अनेक
इसमें इक बरगद का पेड़ रहते जिसमें पक्षी अनेक
बरगद के इस पेड़ नीचे बना हुआ इक चबूतरा
सुबह शाम इसमें लोगों की महफिल खूब जम जाती है,
रौनक इसकी बढ़ जाती जब चाची चबूतरे पर आती है।
इसीलिए अनुराग नगर में ये बरगद बहुत मशहूर हुआ ,
प्रेम से इसको सब कहते है ‘चाची का चबूत
रा’